जेएनएनएसएम के अंतर्गत ऑफ-ग्रिड सौर प्रकाशवोल्टीय परियोजनाओं का कार्यान्वयन
एफएक्यू
1. चैनल साझेदार के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया क्या है
पांच प्रकार के चैनल साझेदार होते हैं और वे इस कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रक्रिया के माध्यम से भाग ले सकते हैं :-
रेस्को (आरईएससीओ) एक इकाई है जिसके द्वारा आरई प्रणालियों को संस्थापित किया जाता है, अपनाया जाता है और प्रचालित किया जाता है तथा उपभोक्ताओं को ऊर्जा सेवाएं प्रदान की जाती हैं। ये इकाइयां इस योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता के लिए वित्तीय संस्थाओं से सम्पर्क कर सकती हैं। वास्तव में ये अकेली ऐसी इकाइयां हैं जो अपने स्तर पर एमएनआरईसे संपर्क कर सकती हैं। सीआरआईएसआईएल द्वारा प्रत्यायन की एक प्रणाली तैयार की जा रही है। सितम्बर, 2010 से ये इकाइयां अपने प्रत्यायन के लिए सीआरआईएसआईएल, सीएआरई अथवा एफआईटीसीएच से संपर्क कर सकती हैं और यदि वे एमएनआरईद्वारा निर्धारित न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करती हैं तो वे सैद्धांतिक अनुमोदन हेतु अपने प्रस्ताव के साथ परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) से संपर्क कर सकती है।
इसके बाद पीएसी द्वारा इकाई को ‘सैद्धांतिक’ अनुमोदन दिया जाएगा और कार्यान्वयन की अनुमति दी जाएगी। पीएसी द्वारा यह भी विनिर्दिष्ट किया जाएगा कि परियोजना के पूर्ण होनेपर निधियों का 50 % स्वत: उपलब्ध हो जाएगा तथा शेष निधियां मानीटरिंग पूरा करने के बाद उपलब्ध कराई जाएंगी।
चैनल भागीदार के रूप में जहां तक वित्तीय संस्थाओं का प्रश्न है, इरेडा द्वारा पहले से ही एक विस्तृत पुनर्निधिकरण योजना अधिसूचित की गई है । एसवपीवी प्रभाग द्वारा एक ईओआई भी जारी किया गया है, जिसमें उन्हें बैंक द्वारा चलाई जाने वाली योजना में साझेदारी करने हेतु इच्छुक इकाइयों से 80 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। एसपीवी द्वारा उत्पादकों का चयन क्षेत्रवार अथवा देश भर में किया जाएगा जो उनके विक्रय के बाद के नेटवर्क की मौजूदा क्षमता पर निर्भर करेगा। इस प्रभाग द्वारा इस बात की जांच करने के पश्चात् की प्रत्येक उत्पादन एमएनआरई द्वारा निर्धारित मानकों को किस प्राकर पूरा करता है, विभिन्न उत्पादों की भी पहचान की जाएगी। उल्लेखनीय है कि उत्पादकों तथा उत्पादों, दोनों को सूचीबद्ध करना एक निरंतर प्रक्रिया होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक मानकों को पूरा करने वाले नए उत्पादकों को भी समुचित रूप से सूचीबद्ध किया जाए। आशा है कि इस प्रक्रिया से नाबार्ड को उन सभी वित्तीय संस्थाओं, जिनके साथ उनका पुनर्वित्तपोषण करार हुआ है,को अपनी अनुमोदन पूर्व योजना की घोषणा करने में सहायता मिलेगी। इरेडा द्वारा मुंबई में 25 अगस्त को करार पर हस्ताक्षर करने के बाद इस योजना का कार्यान्वयन आरंभ करने हेतु नाबार्ड को सांकेतिक निधियां दी जाएगी।
प्रणाली समाकलक सिद्धांत रूप में अनुमोदन प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रारूप में अपनी परियोजना के साथ पीएसी से संपर्क कर सकते हैं। चूंकि ये ऐसी इकाइयां हैं जो पहले अपने लिए बाजार तैयार करेंगी तथा अपने ग्राहकों द्वारा दिए गए अंनतिम आदेशों के आधार पर परियोजना तैयार करेंगी, इसलिए पीएसी द्वारा परियोजना का मूल्यांकन तीन प्राथमिक मानदंडोंके आधार पर किया जाएगा:-
(i) इकाई के कार्मिकों की दक्षता के अनुसार परियोजना के कार्यान्वित करने की उनकी क्षमता ।
(ii) एमएनआरई द्वारा निर्धारित मानको के अनुसार गुणवतता के मानदंडों को पूरा करने से संबंधित ब्यौरा ।
(iii) प्रचालन एवं देखरेख योजना ।
तथापि प्रणाली समाकलों के लिए ऐसे बैंक/बैंकों से संपर्क करना आवश्यक होगा जो समाकलकों उनके ग्राहकों तथा बैंक के साथ एक त्रिस्तरीय व्यवस्था करने के लिए इच्छुक हैं। बैंक/बैंकों द्वारा इरेडा , एनएचबी अथवा नाबार्ड के साथ एक पुनर्वित्तपोषण करार संपन्न करने की भी आवश्यकता होगी। ‘सिद्धांत रूप में’ अनुमोदन के आधार पर बैंक प्रणाली समाकलकों द्वारा पहचान किए गए ग्राहकों को ऋण सहायता उपलब्ध कराने की स्थिति में होगा। यह प्रावधान किया गया है कि योजना के लाभार्थियों को पूंजीगत तथा ब्याज सब्सिडी केवल बैंकिंग चैनल के माध्यम से ही उपलब्ध कराई जाएगी। इरेडा द्वारा अधिसूचित पुनर्वित्तपोषण योजना में इन्हें उपलब्ध कराने से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से ही स्पष्ट रूप से उल्लिखित की गई हैं।
वित्तीय समाकलक ऐसी इकाइयां हैं जिन्हें एमएनआरई से संपर्क करने से पूर्व एक त्रिपक्षीय समझौता करना होता है। यह त्रिपक्षीय समझौता उत्पादकों/सेवा प्रदाताओं, वित्तीय समाकलकों तथा अन्य किस वित्तीय संस्था, जो इस प्रकार के व्यापार माडल को सहायता प्रदान करने में इच्छुक हो, के बीच किया जाना चाहिए। यह परिकल्पित है कि वित्तीय समाकलक अपनेववित्तीय मॉडल के साथ-साथ वे इस वित्तीय/ व्यापार मॉडल के माध्यम से जिस उत्पाद अथवा सेवा को प्रदान करना चाहते हैं, के ब्यौरे के साथ पीएसी से संपर्क करेंगे।
पीएसी द्वारा परियोजना का मूल्यांकन निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर किया जाएगा:-
(i) एमएनआरई द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्ता के मानदंडों को पूरा करने से संबंधित ब्यौरा ।
(ii) इकाई के कार्मिकों की दक्षता के अनुसार परियोजना को कार्यान्वित करने की उनकी क्षमता ।
(iii) इकाई के कार्मिकों की दक्षता के अनुसार परियोजना को कार्यान्वित करने की उनकी क्षमता ।
(iv) प्रचालन एवं देखरेख योजना।
(v) वित्तीय/व्यापार मॉडल और इसकी व्यवहार्यता
आशा की जाती है कि वित्तीय समाकलक भारत के किसी सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंक के साथ भी संबद्ध होंगे ताकि पूंजीगत तथा ब्याज, दोनों प्रकार की सब्सिडी बैंकिंग चैनल के माध्यम से उपलब्ध हो सके और इन्हें इरेडा की पुनर्वित्तपोषण योजना के अंतर्गत शामिल किया जा सके।
जहां तक कार्यक्रम प्रशासकों द्वारा योजना को कार्यान्वित करने का प्रश्न है यह पूर्णत: स्पष्ट है कि किस प्रकार कार्य किया जाना है। एसपीवी तथा सौर तापीय, दोनों के लिए प्रारूप भी तैयार किए गए हैं।
2. परियोजना प्रस्ताव किस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है ?
प्रस्ताव प्रस्तुत करने संबंधी प्रारूप मंत्रालय की वेबसाईट पर दिए गए हैं। पीएसी को इसके दो सेट प्रस्तुत करना आवश्यक है।
3. परियोजना कैसे अनुमोदित की जाएगी ?
चैनल भागीदार से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद अधिकतम 45 दिनों में पीएसी से सैद्धांतिक अनुमोदन दिया जाएगा। अतिरिक्त सूचना मांगने के मामले में पीएसी द्वारा 30 दिनों के अंदर सूचित किया जाएगा। पूर्ण सूचना प्राप्त करेन के पश्चात् दो सप्ताह में प्रस्ताव को पूर्ण किया जाएगा।
4. सब्सिडी संवितरण तंत्र क्या है ?
परियोजना हेतु निधियों की रीलिज बैक एडेड होनी चाहिए क्योंकि प्रतिपूर्ति इसके पूर्ण होने और सत्यापन के बाद है। तथापि कार्यक्रम प्रशासकों के लिए निधियों/की रीलिज पहले की जा सकती है, 70 % की किस्त मंजूरी पर और 30 % पूर्णहोने पर। तथापि, पर्याप्त प्रतिभूतियों के प्रावधान पर अन्य उद्यमियों के लिए इसका विस्तार किया जा सकता है। क्रेडिट से जुड़ी पूंजीगत सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी के संबंध में स्कीम का कार्यान्वयन इरेडा के माध्यम से किया जाएगा, जिसे निधियों के संवितरण हेतु नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया जाएगा।
5. चैनल भागीदारों/वित्तीय समाकलकों/प्रणाली समाकलकों/आरईएससीओ हेतु प्रत्यायन की प्रक्रिया ?
उपरोक्त (i) के अनुसार
6. क्या परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु गैर-सरकारी संगठन सीधे ही एमएनआरई से सम्पर्क कर सकते है ?
एमएनआरई के साथ निकट से काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन की सीधे स्कीम प्राप्त कर सकते हैं। अन्यथा गैर-सरकारी संगठनों को राज्य नोडल एजेंसियों से सम्पर्क करना चाहिए ।
7. क्या उपलब्ध कराई जाने वाली रोशनी प्रणालियां सौर ऊर्जा केन्द्र (एसईसी) अथवा अन्य परीक्षण केन्द्रों द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए ?
मानकों का अनुपालन अनिवार्य है। इस संबंध में परीक्षण केन्द्रों से प्रमाणपत्र सहायता करेंगे और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए ।
8. ऑफ-ग्रिड कार्यक्रम में मॉड्यूलों, बैटरियों और अन्य शेष प्रणालियों की स्थानीय मात्रा पर क्या नीति है ?
स्कीम में समय-समय पर मंत्रालय द्वारा विनिर्दिष्ट राष्ट्रीय / अंतर्राष्ट्रीय मानकों का सही अर्थों में अनुसरण करने के लिए परियोजना प्रस्तावक की आवश्यकता है। स्कीम के अंतर्गत आयातित पूर्णपीवी प्रणाली के प्रयोग की अनुमति नहीं है। तथापि, विनिर्दिष्ट गुणवत्ता मानदंडों और मानकों के उचित स्पष्टीकरण और अनुपालन के अध्यधीन पूर्ण पीवी प्रणाली के आयातित संघटकों के प्रयोग की अनुमित है ।
सौर ऑफ-ग्रिड एसपीवी विद्युत संयंत्रों/ प्रणालियों के संबंध में न्यूनतम तकनीकी आवश्यकताएं और गुणवत्त मानक और सोर ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों हेतु स्कीम के लिए अनुलग्नक-3 में दिए गए हैं। ये मानक एसपीवी उद्योग को तेज करने के लिए पर्याप्त समय दिए जाने हेतु 01 सितम्बर, 2010 से प्रभावी होंगे।
9. चैनल भागीदारों के लिए क्या वित्तीय सीमाएं बनाई गई हैं ?
एक वर्ष की अवधि में परियोजना का कार्यान्वयन करने के लिए चैनल भागीदारों की योग्यता के आधार पर वित्तीय सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। लेकिए पीएसी द्वारा एक करोड़ रू; अथवा 30 किवा.पी. से कम के मूल्य का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस राशि से कम के प्रस्ताव को राज्य स्तर पर संकलित किया जाएगा।
10. क्या वाणिज्यिक उद्यम त्वरित मूल्यहास प्राप्त कर सकते हैं ?
वाणिज्यिक उद्यम आयकर अधिनियम और अन्य अधिसूचनाओं के तहत सौर सहित अक्षय ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए इस समय उपलब्ध सभी लाभ प्राप्त कर सकते है, बशर्तें कि वे शर्तों को पूरा करते हों।
11. यदि कोई चैनल भागीदार केवल पूंजीगत सब्सिडी में रूचि रखता है वो किससे सम्पर्क करना चाहिए ?
केवल अधिकृत चैनल भागीदार और कार्यक्रम प्रशासक की पूंजीगत सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। वाणिज्यिक उद्यम या तो पूंजीगत सब्सिडी अथवा ब्याज सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। सब्सिडी प्राप्त करने के लिए उन्हें चैनल भागीदार से सम्पर्क करना चाहिए ।
12. क्या बिजली के उत्पादन हेतु आरईएससीओ की बिजली बोर्डों से अनुमति की आवश्यकता है?
कैप्टिव विद्युत उत्पादन हेतु प्रक्रिया निर्धारित करने में बिजली अधिनियम 2003 के तहत दिशार्निदेश और उस विशेष राज्य के वर्णित विनियमों को पढ़ने की आवश्यकता है।
13. क्या कहीं भी खोजी गई नई प्रौद्योगिकी को इस कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है ?
सौर प्रणालियों के नए और अभिनव अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने के लिए विनिर्माताओं और अन्य संगठनों के माध्यम से प्रायोगिक और प्रदर्शन परियोजनाएं आरंभ करने के लिए मंत्रालय द्वारा 100% तक की केन्द्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। इस प्रावधान के अंतर्गत अधिकतम 1 करोड़ रू. की केन्द्रीय वित्तीय सहायता की अनुमति होगी। पीएसीद्वारा सौर हेतु नए अनुप्रयोगों (विद्युत स्रोत के रूप में केवल सौर का प्रयोग न करना), बीओएसक की लागत को कम करने की संभावना अथवा प्रणाली डिजाइन में सुधार, अथवा नई संकल्पना आदि जैसे पैरामीटरों के आधार पर प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जाएगा।
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